Engr. Maqbool Akram : The Story Teller

स्पेनिश कैबरे डांसर अनीता डेलगाडो महाराजा कपूरथाला की महारानी : महाराजा के बेटे को दिल दे बैठी

महाराजा कपूरथला जगतजीत सिंह ने स्पेन की खूबसूरत डांसर लड़की से शादी करके उसको अपनी पांचवीं महारानी बना ली. फिर स्थितियां ऐसी हुईं कि विदेशी रानी का दिल महाराजा के बेटे पर आ गया. जब राजा ने दोनों को रंगे हाथों पकड़ा तो क्या हुआ.


हालांकि, हर कहानी का सुखद अंत नहीं होता। महाराजा जगतजीत सिंह अपनी अय्याशी के लिए कुख्यात थे। महारानी होने के नाते, अनीता से यह अपेक्षा की जाती थी कि वह पवित्रता बनाए रखें, जबकि महाराजा कम उम्र की महिलाओं और रखैलियों के साथ संबंध रखते थे।

कई यूरोपीय महिलाओं में, जिन्होंने भारतीय महाराजाओं से विवाह किया, सबसे प्रसिद्ध निस्संदेह अनीता डेलगाडो (1890-1962) थीं, जो स्पेन की फ्लेमेंको नृत्यांगना थीं और आगे चलकर कपूरथला की महारानी बनीं। उनकी कहानी एक आदर्श उदाहरण है, जिसमें एक धनी राजकुमार का भी समावेश है।

उनकी रहस्यमयी कहानी, विशेष रूप से उनके गृह देश स्पेन में, इतनी लोकप्रिय है कि उन पर लगभग आधा दर्जन किताबें लिखी जा चुकी हैं। कुछ साल पहले तो उनकी जिंदगी पर हॉलीवुड फिल्म बनने की भी चर्चा थी, जिसमें पेनेलोप क्रूज़ मुख्य भूमिका निभाएंगी।

यह नियति ही थी, जिसने स्पेन के एक छोटे से शहर की इस युवती को दुनिया के दूसरे छोर पर स्थित कपूरथला की समृद्धि तक पहुँचाया।


अनिता डेलगाडो ब्रियोनेस का जन्म 1890 में दक्षिणी स्पेन के छोटे से शहर मालागा में हुआ था। उनके माता-पिता एक छोटा सा कैफे – ला कास्टाना चलाते थे , जो जुए का अड्डा भी था। लेकिन जब स्पेनिश सरकार ने जुए पर प्रतिबंध लगा दिया, तो अनिता और उनके माता-पिता को आजीविका की तलाश में मैड्रिड पलायन करना पड़ा।

Maharaja Jagjit singh of Kapoorthala State of India

उनके पिता को काम नहीं मिला और परिवार की आर्थिक स्थिति बद से बदतर होती चली गई। इसी दौरान अनिता और उनकी बहन विक्टोरिया ने एक पड़ोसी से नृत्य सीखना शुरू किया, जो मुफ्त में सिखाते थे। अपने पिता की असहमति के बावजूद, बहनों ने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए मंच पर नृत्य करना शुरू कर दिया।

कपूरथला के महाराजा जगतजीत सिंह 16 वर्षीय अनीता की सुंदरता पर पूरी तरह मोहित हो गए थे ।
मई 1906 में, जब अनीता और उसकी बहन ने मैड्रिड के एक आधुनिक नाइटक्लब, कुर्सल फ्रंटन में एक शुरुआती प्रस्तुति दी, तब जाकर हालात बदले। यह नाइटक्लब शहर के धनी लोगों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के बीच भी बेहद लोकप्रिय था।

उस वर्ष एक और भी भव्य सभा आयोजित हुई थी – स्पेन के राजा अल्फोंसो XIII के विवाह में शामिल होने के लिए मैड्रिड आने वाले लोग। उनमें कपूरथला के महाराजा जगतजीत सिंह भी थे, जो 16 वर्षीय अनीता की सुंदरता पर पूरी तरह मोहित हो

कल्पना मात्र ही की जा सकती है कि अनीता के चेहरे पर क्या भाव रहे होंगे, जब उसके प्रदर्शन के अगले दिन सुबह एक भव्य चांदी की बग्घी उसके घर के सामने आकर रुकी और पगड़ी पहने एक आभूषणों से लदे व्यक्ति ने उससे अपने प्रेम का इज़हार किया!

एक सप्ताह के भीतर ही महाराजा का सचिव विवाह का औपचारिक प्रस्ताव लेकर आया। अनीता के रूढ़िवादी ईसाई माता-पिता स्तब्ध रह गए, लेकिन महाराजा द्वारा ‘स्वीकृति’ के बदले एक लाख पाउंड की पेशकश ने उनके पूर्वाग्रहों को दरकिनार कर दिया।

‘माई फेयर लेडी’ की एलिज़ा डूलिटल की तरह, अनीता को भी ताज पहनने के लिए प्रशिक्षण और प्रशिक्षण हेतु पेरिस भेज दिया गया था।

महाराजा का पेरिस में एक विशाल महल था, जो उस समय ‘पवेलियन डी कपूरथला’ के नाम से प्रसिद्ध था ।

अपने संस्मरणों में अनीता लिखती हैं कि उन्हें शिष्टाचार, कई भाषाएँ, भूगोल, संगीत, नृत्य, स्केटिंग, टेनिस और यहाँ तक कि कार चलाना भी सीखना पड़ा।

अंततः, महीनों के प्रशिक्षण के बाद और रानी बनने के लिए तैयार होकर, अनीता 1907 में भारत के लिए रवाना हुईं। बंबई में उतरने पर, एक विशेष कपूरथला रेलगाड़ी उनका इंतज़ार कर रही थी, जो उन्हें कपूरथला ले गई, जहाँ 28 जनवरी 1908 को सिख रीति-रिवाजों के अनुसार उनका विवाह हुआ। तब से अनीता को कपूरथला की महारानी ‘प्रेम कौर’ के नाम से जाना जाने लगा।

अनीता डेलगाडो Anita Delgado -cabret dancer of Spain

शादी पहले स्पेन में कोर्ट में हुई फिर महाराजा उसे अपनी पांचवीं महारानी बनाकर भारत ले आए. यहां वह ऐशोआराम में रहने लगी. लेकिन विदेशी होने की वजह से और खूबसूरती के कारण भी महल में विदेशी रानी के खिलाफ दूसरी रानियां ईर्ष्या रखती थीं. साथ में साजिश भी करती थीं.

उन्होंने सिख रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह किया और अनीता को महारानी ‘प्रेम कौर’ के नाम से संबोधित किया गया।

कपूरथला में अनीता यूरोपीय विलासिता से अछूती नहीं थीं, क्योंकि कपूरथला को ‘पंजाब का पेरिस’ कहा जाता था। कपूरथला के महाराजा जगतजीत सिंह फ्रांस के बड़े प्रशंसक थे और उन्होंने अपने राज्य को फ्रांसीसी शैली में विकसित किया था।

उन्होंने फॉन्टेनब्लू के फ्रांसीसी शाही महल से प्रेरित एक विशाल महल बनवाया था और पेरिस के होटल रिट्ज़ में प्रशिक्षित सर्वश्रेष्ठ फ्रांसीसी रसोइयों को नियुक्त किया था। इतना ही नहीं, शाही परिवार केवल फ्रांसीसी एवियन पानी पीता था, जिसे विशेष रूप से फ्रांस से कपूरथला भेजा जाता था!

यह अनीता का हनीमून का समय था। अनीता लिखती हैं कि उनके पति ने उन्हें नवनिर्मित फ्रांसीसी शैली का महल दिखाते हुए कहा, ” मैंने कभी कल्पना नहीं की थी कि इतनी खूबसूरत महिला यहाँ रहने वाली पहली महिला होगी, लेकिन अब मुझे पता है कि यह तुम्हारे लिए ही नियति थी। “

इसके कुछ ही समय बाद, अनीता ने अजीत सिंह नाम के एक बेटे को जन्म दिया।

भारत में भी अनीता ने सनसनी मचा दी। ब्रिटिश अधिकारी उन्हें नीची नज़र से देखते थे और समारोहों में उनका स्वागत करने से इनकार करते थे।

लेकिन साथ ही, इस ‘अनोखी’ महारानी के बारे में लोगों में व्यापक जिज्ञासा थी। यूरोप की यात्राओं के दौरान, फोटोग्राफर हर जगह उनका पीछा करते थे।

अनीता ने अपना काफी समय मसूरी में बिताया, जहाँ कपूरथला के महाराजा का ‘ चेटो डी कपूरथला ‘ नामक एक विशाल महल था। यहाँ कई महाराजा और उनकी पत्नियाँ उनसे मिलने आते थे।

शादी पहले स्पेन में कोर्ट में हुई फिर महाराजा उसे अपनी पांचवीं महारानी बनाकर भारत ले आए. यहां वह ऐशोआराम में रहने लगी. लेकिन विदेशी होने की वजह से और खूबसूरती के कारण भी महल में विदेशी रानी के खिलाफ दूसरी रानियां ईर्ष्या रखती थीं. साथ में साजिश भी करती थीं ।

महाराजा के बड़े बेटे से विदेशी रानी प्यार कर बैठी

ऐसे में महाराजा का बड़ा बेटा कमल उसके करीब आने लगा. जो हमेशा उसे सपोर्ट करता और भावनात्मक संबल देते हुए उसे बेहतर फील कराता. धीरे धीरे ये स्थिति आ गई कि रानी को उसका साथ अच्छा लगने लगा. लंदन में पढ़े इसे खूबसूरत लंबे बेटे का नाम था कमल. रानी उससे प्यार कर बैठी ।
महाराजा शक करने लगा था


हालांकि वह डरती भी थी कि इसका अंजाम क्या होगा लेकिन इसके बाद भी प्यार कम होने का नाम ही नहीं ले रहा था. दोनों साथ साथ घूमने और मिलने लगे ।

एकांत में प्रेम की जगह तलाशने लगे. महाराजा तक जब ये खबरें पहुंचनी शुरू हुईं तो उन्होंने इस पर विश्वास बेशक नहीं किया लेकिन शक का बीज तो पड़ ही चुका था ।

महाराजा ने स्पेनी सुंदरी से शादी तो कर ली लेकिन जब वह उसको कपूरथला के महल में ले आया तो रानी धीरे धीरे खुद को तन्हा पाने लगी. ऐसे समय में उसके जीवन में सौतेला बेटा कमल आया, जो पढ़ा-लिखा, समझदार और उसे खुश फील कराने वाला था ।

अनीता डेलगाडो Anita Delgado

इस प्यार का भंडाफोड़ लंदन में हुआ. जहां महाराजा अपने लावलश्कर और विदेशी महारानी के साथ गए हुए थे. वहां उन्होंने सेवाए होटल बुक कराया. जब महाराजा कहीं विदेश जाते थे तो पूरा का पूरा होटल बुक करा लेते थे. अगर ऐसा नहीं हो पाता था को तो दो-तीन फ्लोर तो बुक हो ही जाता था.

फिर लंदन में क्या हुआ

महाराजा को शक तो होने लगा कि स्पेनिश महारानी उसके प्रति वफादार नहीं है. उसका कोई और भी प्रेमी भी है. लंदन में इस बार महाराजा ने होटल सेवाए के कुछ फ्लोर किराए पर लिए. ऊपर मंजिल के शानदार सूइट में महाराजा और महारानी रुके

इस प्यार का भंडाफोड़ लंदन में हुआ. जहां महाराजा अपने लावलश्कर और विदेशी महारानी के साथ गए हुए थे. वहां उन्होंने सेवाए होटल बुक कराया. जब महाराजा कहीं विदेश जाते थे तो पूरा का पूरा होटल बुक करा लेते थे. अगर ऐसा नहीं हो पाता था को तो दो-तीन फ्लोर तो बुक हो ही जाता था.

फिर लंदन में क्या हुआ
महाराजा को शक तो होने लगा कि स्पेनिश महारानी उसके प्रति वफादार नहीं है. उसका कोई और भी प्रेमी भी है.

लंदन में इस बार महाराजा ने होटल सेवाए के कुछ फ्लोर किराए पर लिए. ऊपर मंजिल के शानदार सूइट में महाराजा और महारानी रुके. दोनों के अलग अलग शयनकक्ष थे.

बीच में एक गलियारा दोनों शयनकक्ष को एक ड्राइंगरूम में जोड़ता था. बाहर राजा का एक खास नौकर खुशहाल सिंह बैठकर प्रहरा देता रहता था.

रानी रोज रात में प्रेमी से कैसे मिलने लगी

उन दिनों कमल भी लंदन में ही था. रात में महारानी चुपचाप कमल से मिलने लगी. वो अपने कमरे से चुपचाप निकल होटल के ही एक दूसरे कमरे में चली जाती, जहां कमल उसका इंतजार कर रहा होता.

महाराजा के नौकर खुशहाल से ये बात छिपी नहीं रही. एक रात जब रानी कमरे से बाहर निकली तो खुशहाल ने देख लिया. तुरंत राजा को जगाकर सूचना दी. राजा ने कमरा देखा तो वो वहां वाकई नहीं थी.

रानी को महाराजा ने रंगे हाथों पकड़ा

इसके बाद राजा ने तुरंत नीचे की मंजिल के कमरों से अपने अफसरों को बुलाया. उस समय राजा के लावलश्कर के साथ दीवान जरमनी दास भी थे, जिन्होंने इस वाकये को अपनी किताब “महाराजा” में लिखा. ये वाकया जेवियर मोरो ने भी अपनी किताब “पैशन इंडिया” में लिखा.

जब सभी लोग महाराजा के कमरे में बैठकर रानी का इंतजार करने लगे तो कुछ देर बाद रानी नाइट गाउन में बिखरे बालों के साथ वहां पहुंची.

महाराजा बिफर उठा, तलाक पर अड़ गया

महाराजा बिफर उठा.रानी बार बार सफाई दे रही थी कि वो नीचे के कमरे में अपनी फ्रांसीसी परिचारिका के पास गई थी, क्योंकि उसको नींद नहीं आ रही थी. महाराजा इस बात को मानने को तैयार नहीं था.

वो लगातार अड़ा हुआ था कि रानी नीचे के कमरों में अपने प्रेमी के पास गई थी.रानी के रोने का भी उस पर कोई असर नहीं नजर आ रहा था. रातभर ये नौटंकी चलती रही. राजा ने फैसला सुनाया कि अब वो अपनी स्पेनिश सुंदरी महारानी को तलाक दे देगा.

जिन्ना तब लंदन में थे. वह कई मुकदमों में महाराजा के वकील भी थे. वह लंदन के होटल में महाराजा जगतजीत सिंह को समझाने पहुंचे कि उनकी बीवी ने कुछ ऐसा नहीं किया है कि उस पर शक किया जा सके लेकिन राजा ये बात मानने को तैयार ही नहीं था.

तब जिन्ना को गुस्सा आ गया. उसने फिर पेशेवर वकील की तरह महाराजा को कहा कि ये तलाक उसको बहुत भारी पड़ेगा.

जिन्ना ने महाराजा को कोर्ट में घसीटने की धौंस दी
महाराजा का कहना था कि रानी का अपने कमरे से रात में गायब हो जाना बड़ा सबूत है. जिन्ना ने पलटकर कहा कि ये कोई सबूत नहीं है. अगर वो तलाक देना चाहता है तो बेशक दे लेकिन रानी को मोटा भत्ता बांध दे. महाराजा इसके लिए भी तैयार नहीं था. लेकिन जिन्ना ने फिर जिस तरह के तर्क दिए और राजा को कोर्ट तक ले जाने की धौंस दी तो राजा ठंडा पड़ने लगा.

राजा को मोटा हर्जाना देना पड़ा
आखिरकार महाराजा तलाक और खास सालाना भत्ते के लिए तैयार हो गया. जिन्ना से महाराजा से 36000 रुपए सालाना का भत्ता तैयार कराया, जो उस समय के लिहाज से बहुत बड़ी रकम थी. साथ ही अनिता से हुए बेटे अजित सिंह के लिए 24000 रुपए का सालाना भत्ता, जब तक कि वो जवान नहीं हो जाता.

दोनों के अलग अलग शयनकक्ष थे. बीच में एक गलियारा दोनों शयनकक्ष को एक ड्राइंगरूम में जोड़ता था. बाहर राजा का एक खास नौकर खुशहाल सिंह बैठकर प्रहरा देता रहता था.

रानी रोज रात में प्रेमी से कैसे मिलने लगी

उन दिनों कमल भी लंदन में ही था. रात में महारानी चुपचाप कमल से मिलने लगी. वो अपने कमरे से चुपचाप निकल होटल के ही एक दूसरे कमरे में चली जाती, जहां कमल उसका इंतजार कर रहा होता. महाराजा के नौकर खुशहाल से ये बात छिपी नहीं रही.

एक रात जब रानी कमरे से बाहर निकली तो खुशहाल ने देख लिया. तुरंत राजा को जगाकर सूचना दी. राजा ने कमरा देखा तो वो वहां वाकई नहीं थी.

 किताब “पैशन इंडिया” में लिखा. जब सभी लोग महाराजा के कमरे में बैठकर रानी का इंतजार करने लगे तो कुछ देर बाद रानी नाइट गाउन में बिखरे बालों के साथ वहां पहुंची.

महाराजा बिफर उठा, तलाक पर अड़ गया

महाराजा बिफर उठा.रानी बार बार सफाई दे रही थी कि वो नीचे के कमरे में अपनी फ्रांसीसी परिचारिका के पास गई थी, क्योंकि उसको नींद नहीं आ रही थी. महाराजा इस बात को मानने को तैयार नहीं था.

वो लगातार अड़ा हुआ था कि रानी नीचे के कमरों में अपने प्रेमी के पास गई थी.रानी के रोने का भी उस पर कोई असर नहीं नजर आ रहा था. रातभर ये नौटंकी चलती रही. राजा ने फैसला सुनाया कि अब वो अपनी स्पेनिश सुंदरी महारानी को तलाक दे देगा.

जिन्ना तब लंदन में थे. वह कई मुकदमों में महाराजा के वकील भी थे. वह लंदन के होटल में महाराजा जगतजीत सिंह को समझाने पहुंचे कि उनकी बीवी ने कुछ ऐसा नहीं किया है कि उस पर शक किया जा सके लेकिन राजा ये बात मानने को तैयार ही नहीं था. तब जिन्ना को गुस्सा आ गया. उसने फिर पेशेवर वकील की तरह महाराजा को कहा कि ये तलाक उसको बहुत भारी पड़ेगा

जिन्ना ने महाराजा को कोर्ट में घसीटने की धौंस दी
महाराजा का कहना था कि रानी का अपने कमरे से रात में गायब हो जाना बड़ा सबूत है. जिन्ना ने पलटकर कहा कि ये कोई सबूत नहीं है. अगर वो तलाक देना चाहता है तो बेशक दे लेकिन रानी को मोटा भत्ता बांध दे. महाराजा इसके लिए भी तैयार नहीं था. लेकिन जिन्ना ने फिर जिस तरह के तर्क दिए और राजा को कोर्ट तक ले जाने की धौंस दी तो राजा ठंडा पड़ने लगा.

राजा को मोटा हर्जाना देना पड़ा
आखिरकार महाराजा तलाक और खास सालाना भत्ते के लिए तैयार हो गया. जिन्ना से महाराजा से 36000 रुपए सालाना का भत्ता तैयार कराया, जो उस समय के लिहाज से बहुत बड़ी रकम थी. साथ ही अनिता से हुए बेटे अजित सिंह के लिए 24000 रुपए का सालाना भत्ता, जब तक कि वो जवान नहीं हो जाता.

बाद में रानी का क्या हुआ


इस तलाक के बाद कमल से भी रानी के संबंध खत्म हो गए. वह स्पेन वापस आ चुकी थी. बाद में वो गुप्त रूप से सेक्रेट्री के साथ पेरिस में रहने लगी.

जेवियर मोरो की किताब के अनुसार, जिसे वह अपना सेक्रेटरी बताती थीं, वह उनके प्रेमी और करीबी दोस्त थे. उनका नाम गाइनेस फर्नांडिज दि सेग्यूरा था. वह अनिता की एक रिश्ते की बहन के पति थे और जब वह अनिता के करीब आए तब विधुर हो चुके थे. वह स्टॉक ब्रोकर और सुशिक्षित शख्स थे, जो कई भाषाएं बोल लेते थे. रानी का एक बेटा था अजीत. बाद में बड़े होने पर उसकी भी मृत्यु हो गई.

तलाक के बाद, अनीता ने पेरिस, स्विट्जरलैंड, मैड्रिड और मलागा में घर लेकर आलीशान जीवन व्यतीत किया। कहा जाता है कि वह अपने कीमती गहने पहनती रहीं और सोने के बने चम्मच-कांटे से खाना भी खाती थीं।

उन्होंने अपनी आत्मकथा लिखने में भी समय बिताया, क्योंकि उन्हें लगता था कि उनकी कहानी बताई जानी चाहिए। 1962 में 72 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उन्होंने अपने गहने अपने बेटे प्रिंस अजीत को और अपनी अन्य संपत्ति अपनी भतीजियों को दे दी।

हालांकि, अनीता की अनोखी कहानी उनकी मृत्यु के साथ समाप्त नहीं होती। उनके बेटे, राजकुमार अजीत सिंह ने ब्यूनस आयर्स और लंदन में भारतीय राजनयिक के रूप में कार्य किया और 1984 में नई दिल्ली में अविवाहित अवस्था में उनका निधन हो गया।

अनीता का परिवार समाप्त हो गया था, या कम से कम 2009 तक यही माना जाता था, जब लेबनानी-अमेरिकी पत्रकार महा अख्तर ने अपनी बहुचर्चित पुस्तक ‘ महारानी की छिपी हुई पोती ‘ प्रकाशित की, जिसमें उन्होंने खुलासा किया कि कैसे अपने जन्म प्रमाण पत्र की खोज से पता चला कि वह राजकुमार अजीत की नाजायज संतान थीं।

उन्होंने दावा किया कि उनकी मां ने अपनी मृत्युशय्या पर इस तथ्य की पुष्टि की थी। महा के पास एक नीलम की अंगूठी भी है जो कभी अनीता की थी।

The End

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