Engr. Maqbool Akram : The Story Teller

Jagjit and Chitra : The Ten best timeless Ghazals that touches the heart and soul

His voice and the depth of his emotions will forever stay in my heart.
‘ग़ज़ल सम्राट’ जगजीत सिंह (Jagjit Singh) ने अपनी दिलकश आवाज़ और रूहानी धुनों से लाखों दिलों को जीता है।जगजीत सिंह (8 फरवरी 1941 – 10 अक्टूबर 2011) ।

राजस्थान के श्रीगंगानगर में जन्मे जगजीत सिंह ने अपनी मखमली आवाज़ से ग़ज़लों को आम लोगों तक पहुँचाया। उनकी ग़ज़लों की सबसे बड़ी खूबी उनकी आम बोलचाल की हिंदी और उर्दू थी।

जगजीत सिंह जब कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे तो उसी दौरान उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो में काम करना शुरू कर दिया। इसी दौरान उनकी दिलस्पी गाने में हुई। जगजीत सिंह ने पंडित छगन लाल शर्मा और मैहर घराने के उस्ताद जमाल खान ने क्लासिकल म्यूजिक की ट्रेनिंग लेनी शुरू कर दी।

जगजीत सिंह के पिता चाहते थे कि बेटा इंजीनियर बने, लेकिन संगीत में दिलचस्पी को देखते हुए उन्होंने अपने इस सपने को त्याग दिया। पिता ने जगजीत सिंह का संगीत की दुनिया में करियर बनाने के लिए हौसला बढ़ाया।

साल 1965 में जगजीत सिंह म्यूजिक की दुनिया में अपना करियर बनाने के लिए परिवार को बताए बिना बॉम्बे आ गए।

‘बीबीसी’ के मुताबिक, शुरुआत में जगजीत सिंह बेरीज रेस्ट्रॉन्ट में गाते थे। यहीं से उनका प्राइवेट फंक्शन्स में गाना शुरू हुआ। गाने पर जगजीत सिंह को कभी पैसे मिल जाते तो कभी फ्री में शराब और खाना। उनकी जिंदगी ऐसे ही चल रही थी।

लेकिन जगजीत सिंह से सफलता काफी दूर थी। किस्मत तब बदली जब 1967 में जगजीत सिंह की मुलाकात चित्रा से हुई।

दो साल बाद चित्रा और जगजीत सिंह ने शादी कर ली और फिर कुछ साल बाद अपना पहला एल्बम The Unforgettable रिलीज किया। यह एल्बम ब्लॉकबस्टर रहा और इसने जगजीत सिंह और चित्रा का करियर चमका दिया।

जगजीत सिंह को अपने गाने और गजलों के लिए सिख वेश तक त्यागना पड़ गया था। यह तब की बात है जब एचएमवी ने उनका पहला रिकॉर्ड रिलीज किया था।

दरअसल तब जगजीत सिंह सिख लुक रखते थे। वह पगड़ी पहनते थे। बाल और दाढ़ी बढ़ी रहती थी। एचएमवी ने उस रिकॉर्ड पर जगजीत सिंह की तस्वीर लगाने के लिए मांगी। लेकिन कहा कि वह जगजीत सिंह की सिख वेश वाली तस्वीर नहीं लगा सकते क्योंकि लोग किसी सिख को गजल गाते हुए स्वीकार नहीं करेंगे।

एचएमवी ने जगजीत सिंह से कहा कि वह अपने बाल कटवा लें और पगड़ी भी हटा दें। जगजीत सिंह को तब तगड़ा झटका लगा था। लेकिन करियर और गजलों के लिए जगजीत सिंह को यह फैसला मानना पड़ा। जगजीत सिंह ने गजलों के लिए अपना सिख वेश कुर्बान कर दिया।

जिसकी आवाज में इतनी मुहब्‍बत और दर्द हो, उसकी अपनी जिंदगी भी मुहब्‍बत की दास्‍तानों से खाली नहीं था । जालंधर में कॉलेज के समय ही एक लड़की बड़ी अच्‍छी लगती थी, लेकिन कभी कहने की हिम्‍मत नहीं हुई।

साइकिल से कॉलेज जाते हुए हर बार उस लड़की के घर के सामने ही साइकिल की चेन उतर जाती या टायर की हवा निकल जाती । इस उम्‍मीद में कि क्‍या पता उसकी एक झलक देखने को मिल जाए । मुहब्‍बत बस यूं ही दूर-दूर से देखा-देखी तक ही सिमटकर रह गई ।

फिर वक्‍त का पहिया घूमा और जगजीत बंबई आ गए. यहां उनकी मुलाकात चित्रा से हुई । चित्रा ब्रिटानिया कंपनी के बड़े अधिकारी देबू प्रसाद दत्‍ता की बीवी थीं और उनकी एक बेटी भी थी ।

वह जगजीत के संघर्ष के दिन थे । एक रिकॉर्डिंग स्‍टूडियो में दोनों की पहली मुलाकात हुई । चित्रा की शादी पहले ही मुश्किल दौर से गुजर रही थी। दोनों एक दूसरे के करीब आ गए और उन्‍होंने शादी कर ली ।

जगजीत सिंह की जिंदगी का सबसे मुश्किल दौर वह था, जब उनके बेटे की अचानक एक कार एक्‍सीडेंट में मौत हो गई ।

1990 में एक कार दुर्घटना में उनके इकलौते बेटे विवेक (20 वर्ष) की असामयिक मृत्यु हो गई, जिसने उन्हें गहरा सदमा पहुँचाया और उनके अधिकांश गीत दर्द और संवेदनशीलता से भर गए।

इस हादसे का पति-पत्‍नी दोनों पर बहुत गहरा असर हुआ । पत्‍नी चित्रा ने तो उस हादसे के बाद गाना ही छोड़ दिया । जगजीत सिंह की भी बाकी की बची उम्र उस सदमे से बाहर निकलने में ही गुजर गई ।

एक साल तक संगीत से दूर रहे । एक साल बाद धीरे-धीरे संगीत की ओर वापसी की शुरुआत हुई भी तो एक और हादसे न उनकी बची-खुची उम्‍मीद भी छीन ली । उनकी बेटी ने आत्‍महत्‍या कर ली । उसके बाद तो वह आध्‍यात्‍म की ओर मुड़ गए । ईश्‍वर में अपने दुखों से निजात की राह ढूंढने लगे ।

छह महीने तक वे मौन रहे। चित्रा जी इस सदमे से कभी उबर नहीं पाईं और इस दुखद घटना के बाद उन्होंने गाना बंद कर दिया। जो लोग उन्हें करीब से जानते हैं, वे कहते हैं कि इसके बाद वे अपने सभी गीत अपने बेटे को समर्पित करते थे।

जब आप उनकी ग़ज़लों को ध्यान से सुनते हैं, तो आप उनकी आवाज़ में गहरे दर्द को महसूस कर सकते हैं । जीवन के अंतिम दिनों में इतने सारे मुश्किलात का सामना करने वाले जगजीत सिंह काफी बीमार रहने लगे थे । 2011 में ब्रेन हैमरेज के कारण मुंबई के लीलावती अस्पताल में उनका निधन हो गया।

उनके गाए हुए कई गीत अमर हैं। यहाँ उनकी कुछ सबसे लोकप्रिय और दिल को छू लेने वाली अनमोल गीत हैं जिन्हें मैं बार-बार सुन सकता हूँ ।ये तो बस कुछ ही उदाहरण हैं जो मुझे अभी याद आ रहे हैं।

1-Tum Ko Dekha To Yeh Khayal Aaya.
Performed By: जगजीत सिंह , चित्रा सिंह-Lyric : Javed Akhtar
Film: Saath Saath

तुमको देखा तो ये ख़याल आया
ज़िन्दगी धूप तुम घना साया

आज फिर दिल ने इक तमन्ना की
आज फिर दिल को हमने समझाया

तुम चले जाओगे तो सोचेंगे
हमने क्या खोया हमने क्या पाया

हम जिसे गुनगुना नहीं सकते
वक़्त ने ऐसा गीत क्यों गाया

2-Hoshwalon Ko Khabar Kya-Jagjit Singh-Sarfarosh
Performed By: जगजीत – Lyric: Nida Fazli
Film: Sarfarosh

होश वालों को ख़बर क्या बेख़ुदी क्या चीज़ है
इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िन्दगी क्या चीज़ है

उन से नज़रें क्या मिली रोशन फ़िज़ाएँ हो गईं
आज जाना प्यार की जादूगरी क्या चीज़ है

खुलती ज़ुल्फ़ों ने सिखाई मौसमों को शायरी
झुकती आँखों ने बताया मयकशी क्या चीज़ है

हम लबों से कह न पाये उन से हाल-ए-दिल कभी
और वो समझे नहीं ये ख़ामोशी क्या चीज़ है

3-Hothon Se Chhu Lo Tum- Jagjit Singh (From “Prem Geet”)
Performed By: जगजीत सिंह – Lyric : Indivar
Film: Prem Geet

होंठों से छूलो तुम
मेरा गीत अमर कर दो
बन जाओ मीत मेरे
मेरी प्रीत अमर कर दो

न उमर की सीमा हो
न जनम का हो बंधन
जब प्यार करे कोई
तो देखे केवल मन
नई रीत चलाकर तुम
ये रीत अमर कर दो
होंठों से छूलो तुम …

जग ने छीना मुझसे
मुझे जो भी लगा प्यारा
सब जीता किये मुझसे
मैं हर दम ही हारा
तुम हार के दिल अपना
मेरी जीत अमर कर दो
होंठों से छूलो तुम …

आकाश का सूनापन
मेरे तनहा मन में
पायल छनकाती तुम
आजाओ जीवन में
साँसें देकर अपनी
संगीत अमर कर दो
होंठों से छूलो तुम …

4-Tum Itna Jo Muskura Rahe Ho.
Performed By: जगजीत सिंह – Lyric :Kaifi Azmi
Film: Sath Sath

तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो
क्या गम है जिसको छुपा रहे हो

आँखों में नमी, हँसी लबों पर
क्या हाल है क्या दिखा रहे हो

बन जायेंगे ज़हर पीते पीते
ये अश्क जो पिए जा रहे हो

जिन ज़ख्मों को वक़्त भर चला है
तुम क्यों उन्हें छेड़े जा रहे हो

रेखाओं का खेल है मुक़द्दर
रेखाओं से मात खा रहे हो

5-Kal Chaudhvin Ki Raat Thi-Jagjit Singh (Ahista Ahista)
Performed By: जगजीत सिंह-Lyrics By: इब्न-ए-इन्शा-Ibn e Insha
Film : Ahista Ahista

कल चौदहवीं की रात थी
शब भर रहा चर्चा तेरा
कल चौदहवीं की रात थी
कुछ ने कहा ये चाँद है
कुछ ने कहा, चेहरा तेरा
कल चौदहवीं की रात थी

हम भी वहीं, मौजूद थे
हम से भी सब पुछा किए
हम हँस दिए, हम चुप रहे
मंज़ूर था परदा तेरा
कल चौदहवीं की रात थी…

इस शहर में किस से मिलें
हम से तो छूटी महफिलें
हर शख्स तेरा नाम ले
हर शख्स दीवाना तेरा
कल चौदहवीं की रात थी…

कूचे को तेरे छोड़ कर
जोगी ही बन जाएँ मगर
जंगल तेरे, पर्वत तेरे
बस्ती तेरी, सेहरा तेरा
कल चौदहवीं की रात थी…

बेदर्द सुन्नी हो तो चल
कहता है क्या अच्छी ग़ज़ल
आशिक तेरा, रुसवा तेरा
शायर तेरा, इंशा तेरा
कल चौदहवीं की रात थी…

6-Tera Chehra Hai Aaeene Jaisa
Performed By: जगजीत सिंह- Lyric: Peyaam Saidi

तेरा चेहरा है आईने जैसा,
क्यो न देखू है देखने जैसा,

तुम कहो तो मैं पूछ लू तुमसे,
है सवाल एक पूछने जैसा,

दोस्त मिल जायेगे कई लेकिन,
न मिलेगा कोई मेरे जैसा,

तुम अचानक मिले थे जब पहले,
पल नही है वो भूलने जैसा,

7-Baat Niklegi to Phir Door Tak
Performed By: जगजीत सिंह-Lyric : Kafeel Aazar Amrohvi

बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जायेगी

लोग बेवजह उदासी का सबब पूछेंगे
ये भी पूछेंगे के तुम इतनी परेशां क्यूँ हो
उंगलियां उठेंगी सूखे हुए बालों की तरफ़
एक नज़र देखेंगे गुज़रे हुए सालों की तरफ़
चूड़ियों पर भी कई तंज़ किये जायेंगे
काँपते हाथों पे भी फ़िकरे कसे जायेंगे


लोग ज़ालिम हैं हर एक बात का ताना देंगे
बातों बातों में मेरा ज़िक्र भी ले आयेंगे
उनकी बातों का ज़रा सा भी असर मत लेना
वरना चेहरे की तासुर से समझ जायेंगे
चाहे कुछ भी हो सवालात ना करना उनसे
मेरे बारे में कोई बात न करना उनसे

बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जायेगी

8-Main Nashe Mein Hoon
Performed By: जगजीत सिंह – Lyric: Shahid Kabir

ठुकराओ अब के प्यार करो, मैं नशे मे हुँ,
जो चाहे मेरे यार करो, मैं नशे मे हुँ,

अभी दिला रहा हुँ यकीन-ए-वफ़ा मगर,
मेरा ना एतबार करो, मैं नशे मे हुँ,

गिरने दो तुम मुझे मेरा सागर सम्भाल लो,
इतना तो मेरे यार करो, मैं नशे मे हुँ,

मुझको कदम कदम पे भटकने दो आज दोस्त,
तुम अपना करोबार करो, मैं नशे मे हुँ,

फ़िर बेखुदी में हद से गुजर ने लगा हुँ मैं,
इतना ना मुझ से प्यार करो ,मैं नशे मे हुँ,

9-Mere Dil Mein Tu Hi Tu Hai
Performed By: जगजीत सिंह, चित्रा सिंह-Lyric: Kaifi Azmi

मेरे दिल में तू ही तू है
दिल की दवा क्या करूँ
दिल भी तू है, जाँ भी तू है
तुझ पे फ़िदा क्या करूँ
मेरे दिल में तू…

खुद को खो के, तुझको पा कर
क्या-क्या मिला क्या कहूँ
तेरी हो के जीने में क्या
आया मज़ा क्या कहूँ
कैसे दिन हैं, कैसी रातें
कैसी फिज़ा क्या कहूँ
मेरी हो के तूने मुझको
क्या-क्या दिया क्या कहूँ
मेरे पहलू में जब तू है
फिर मैं दुआ क्या करूँ
दिल भी तू है…

है ये दुनिया, दिल की दुनिया
मिल के रहेंगे यहाँ
लूटेंगे हम खुशियाँ हर पल
दुख ना सहेंगे यहाँ
अरमानों के चंचल धारें
ऐसे बहेंगे यहाँ
ये तो सपनों की जन्नत है
सब ही कहेंगे यहाँ
ये दुनिया मेरे दिल में बसी है
दिल से जुदा क्या करूँ
दिल भी तू है..

10-Bahut Pahele Se Un Qadmon Ki Aahat Jaan Lete Hain-
Performed By: जगजीत सिंग, चित्रा सिंह-Lyric: Firaq Gorakhpuri

बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं
तुझे ऐ ज़िन्दगी हम दूर से पहचान लेते हैं

तबीयत अपनी घबराती है जब सुनसान रातों में
हम ऐसे में तेरी यादों की चादर तान लेते हैं
बहुत पहले से

मेरी नज़रें भी ऐसे काफ़िरों का जान-ओ-ईमाॅं हैं
निगाहें मिलते ही जो जान और ईमान लेते हैं
बहुत पहले से

‘फ़िराक़’ अक्सर बदल कर भेस मिलता है कोई काफ़िर
कभी हम जान लेते हैं, कभी पहचान लेते हैं
बहुत पहले से…

The End

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