Engr. Maqbool Akram : The Story Teller

लेडी चैटरलीज़ लवर: प्रेम जुनून और सामाजिक बंधनों को चुनौती (डी.एच. लॉरेंस का अमर उपन्यास)

सतही तौर पर ‘लेडी चैटरलीज़ लवर ‘एक अपाहिज पति, उसकी ख़ूबसूरत पत्नी और उस पत्नी के प्रेमी की यौन कथा प्रतीत होती है किन्तु वास्तव में ये तीनों पात्र प्रतीक मात्र हैं।

‘सर-क्लिफ़र्ड चैटरली ‘एक पथरीली, मृतप्राय, अपाहिज, देहविहीन हो चली संस्कृति, उसकी पत्नी ‘कॉन्स्टेंस (लेडी चैटरली) ‘जीवन की निरंतरता और शाश्वतता तथा उसका प्रेमी ‘ओलीवर मैलर्स ‘- मनुष्य के नैसर्गिक और भौतिक स्वरूप का प्रतीक है।

कॉन्स्टेंस के अनुसार स्त्री का सौन्दर्य केवल उसके बाहरी रूप या मुखमंडल ही में नहीं केन्द्रित रहता है बल्कि वास्तव में उसके आवरण में लिपटे और ढंके देह में समाया रहता है। स्त्री सौन्दर्य की अनुभूति उसके वस्त्रों के भीतर छिपे अवयवों और देहयष्टि से होती है।

इसी दृष्टि से ग्रीक और रोमन (एफ़्रोडाइट और वीनस) सौन्दर्य की प्रतिमाओं को नग्न रूप में तराशा गया।

कॉन्स्टेंस अपनी देह की सुंदरता के प्रति स्वयं मुग्ध थी किन्तु उसे अफ़सोस था कि उसका पति उसकी सुंदरता से विमुख और अनभिज्ञ है। वह अपने देह की मादक सुंदरता से क्लिफ़र्ड को सम्मोहित करने के लिए एक रात उसके सम्मुख निर्वस्त्र प्रकट होती है।

वह पति के मुख से अपनी सम्मोहक देह की प्रशंसा सुनना चाहती थी जिससे आंशिक रूप से उसकी यौन तुष्टि मानसिक धरातल पर हो सके। किन्तु उसे अपने निर्वसन देह प्रदर्शन के लिए क्लिफ़र्ड से क्रोध भरी भर्त्सना मिलती है।

क्लिफ़र्ड के इस संवेदनहीन नपुंसक नीरसता पर उसे खीझ होती है। वह कुंठित और अपमानित अवस्था में पति के शयन कक्ष से निकल आती है।उसे अपने सुंदर देह की निरर्थकता का बोध होने लगता है।

यह बोध उसके लिए असहनीय और पीड़ादायक हो उठता है। वह उस यंत्रणा से मुक्त होना चाहती है।

लेडी चैटरलीज़ लवर , कॉन्स्टेंस रीड की कहानी है, जो एक कुलीन महिला है और अपने पति के साथ साझा की जाने वाली जागीर के रखवाले ओलिवर मेलर्स के साथ एक भावुक प्रेम प्रसंग में पड़ जाती है।

जब यह उपन्यास पहली बार प्रकाशित हुआ था, तो इसमें यौन और महिलाओं की इच्छाओं के स्पष्ट चित्रण के कारण यह काफी विवादास्पद रहा था।

इसे कई देशों में प्रतिबंधित कर दिया गया और अन्य देशों में इस पर सेंसरशिप लगाई गई, और तब से यह यौन मुक्ति और सेंसरशिप-विरोधी विचारों का पर्याय बन गया है।

कॉलेज के दिनों में बहुत से युवाओं ने लेडी चैटरली का क़िस्सा पढ़ा होगा. ज़मींदार परिवार की महिला के एक कामगार से जिस्मानी ताल्लुक़ात को डी एच लॉरेंस ने अपने उपन्यास ‘लेडी चैटरलीज़ लवर’ में विस्तार से बयां किया था ।

लेडी चैटरली की कामुकता के बहुत से युवा दीवाने बन गए थे. उन्हें लगता था कि लॉरेंस के उपन्यास का ये किरदार हक़ीक़त में उनकी ज़िंदगी में आ जाए तो क्या लुत्फ़ हो.

अल्हड़, मदमस्त, कामुक लेडी चैटरली ने दुनिया भर में करोड़ों लोगों को अपना दीवाना बना लिया था.

पर, लेडी चैटरली के क़िस्से के रसिक करोड़ों लोगों में बहुत कम ही लोगों को मालूम होगा कि डीएच लॉरेंस के उपन्यास का वो किरदार कोई गढ़ा हुआ नहीं था.

वो किरदार एक कल्पना भर नहीं, जीती-जागती महिला थी, जो लॉरेंस की ज़िंदगी पर गहरा असर छोड़ गई थी ।

सतही तौर पर ‘लेडी चैटरलीज़ लवर‘ एक अपाहिज पति, उसकी ख़ूबसूरत पत्नी और उस पत्नी के प्रेमी की यौन कथा प्रतीत होती है किन्तु वास्तव में ये तीनों पात्र प्रतीक मात्र हैं।

सर-क्लिफ़र्ड चैटरली‘ एक पथरीली, मृतप्राय, अपाहिज, देहविहीन हो चली संस्कृति, उसकी पत्नी ‘कॉन्स्टेंस (लेडी चैटरली)‘ जीवन की निरंतरता और शाश्वतता तथा उसका प्रेमी ‘ओलीवर मैलर्स‘ – मनुष्य के नैसर्गिक और भौतिक स्वरूप का प्रतीक है।

कॉन्स्टेंस के अनुसार स्त्री का सौन्दर्य केवल उसके बाहरी रूप या मुखमंडल ही में नहीं केन्द्रित रहता है बल्कि वास्तव में उसके आवरण में लिपटे और ढंके देह में समाया रहता है। स्त्री सौन्दर्य की अनुभूति उसके वस्त्रों के भीतर छिपे अवयवों और देहयष्टि से होती है।

इसी दृष्टि से ग्रीक और रोमन (एफ़्रोडाइट और वीनस) सौन्दर्य की प्रतिमाओं को नग्न रूप में तराशा गया।

कॉन्स्टेंस अपनी देह की सुंदरता के प्रति स्वयं मुग्ध थी किन्तु उसे अफ़सोस था कि उसका पति उसकी सुंदरता से विमुख और अनभिज्ञ है। वह अपने देह की मादक सुंदरता से क्लिफ़र्ड को सम्मोहित करने के लिए एक रात उसके सम्मुख निर्वस्त्र प्रकट होती है।

वह पति के मुख से अपनी सम्मोहक देह की प्रशंसा सुनना चाहती थी जिससे आंशिक रूप से उसकी यौन तुष्टि मानसिक धरातल पर हो सके। किन्तु उसे अपने निर्वसन देह प्रदर्शन के लिए क्लिफ़र्ड से क्रोध भरी भर्त्सना मिलती है।

क्लिफ़र्ड के इस संवेदनहीन नपुंसक नीरसता पर उसे खीझ होती है। वह कुंठित और अपमानित अवस्था में पति के शयन कक्ष से निकल आती है।उसे अपने सुंदर देह की निरर्थकता का बोध होने लगता है। यह बोध उसके लिए असहनीय और पीड़ादायक हो उठता है। वह उस यंत्रणा से मुक्त होना चाहती है।

लेडी चैटरलीज़ लवर , कॉन्स्टेंस रीड की कहानी है, जो एक कुलीन महिला है और अपने पति के साथ साझा की जाने वाली जागीर के रखवाले ओलिवर मेलर्स के साथ एक भावुक प्रेम प्रसंग में पड़ जाती है।

जब यह उपन्यास पहली बार प्रकाशित हुआ था, तो इसमें यौन और महिलाओं की इच्छाओं के स्पष्ट चित्रण के कारण यह काफी विवादास्पद रहा था।

इसे कई देशों में प्रतिबंधित कर दिया गया और अन्य देशों में इस पर सेंसरशिप लगाई गई, और तब से यह यौन मुक्ति और सेंसरशिप-विरोधी विचारों का पर्याय बन गया है।

वर्ग भेद और तेजी से अलग-थलग पड़ते संसार में आत्म-पहचान की खोज पर इसके मार्मिक अवलोकन ने इसे लॉरेंस के महानतम उपन्यासों में स्थान दिलाया है।

कॉलेज के दिनों में बहुत से युवाओं ने लेडी चैटरली का क़िस्सा पढ़ा होगा. ज़मींदार परिवार की महिला के एक कामगार से जिस्मानी ताल्लुक़ात को डी एच लॉरेंस ने अपने उपन्यास ‘लेडी चैटरलीज़ लवर’ में विस्तार से बयां किया था ।

लेडी चैटरली की कामुकता के बहुत से युवा दीवाने बन गए थे. उन्हें लगता था कि लॉरेंस के उपन्यास का ये किरदार हक़ीक़त में उनकी ज़िंदगी में आ जाए तो क्या लुत्फ़ हो ।

अल्हड़, मदमस्त, कामुक लेडी चैटरली ने दुनिया भर में करोड़ों लोगों को अपना दीवाना बना लिया था ।

पर, लेडी चैटरली के क़िस्से के रसिक करोड़ों लोगों में बहुत कम ही लोगों को मालूम होगा कि डीएच लॉरेंस के उपन्यास का वो किरदार कोई गढ़ा हुआ नहीं था. वो किरदार एक कल्पना भर नहीं, जीती-जागती महिला थी, जो लॉरेंस की ज़िंदगी पर गहरा असर छोड़ गई थी ।

लेकिन ‘लेडी चैटरली’ केवल अश्लील कामुकता से कहीं अधिक है, और लॉरेंस इसके पन्नों में कई सामाजिक मुद्दों को संबोधित करती हैं।

सर–क्लिफ़र्ड और कॉन्स्टेंस अभिजात वर्ग के दंपति हैं और मैलर्स, सर–क्लिफ़र्ड के एस्टेट का रखवाला है, सर–क्लिफ़र्ड के वन्य संपत्ति का प्रहरी है।

सर–क्लिफ़र्ड, प्रथम विश्व युद्ध में अपने दोनों पैर खो बैठा है और उसके शरीर का निचला हिस्सा पूरी तरह निष्प्राण हो गया है। वह एक बेजान सा व्यक्ति है जो व्हील चेयर पर ही अपना जीवन गुज़ारता है।

उसकी ख़ूबसूरत पत्नी कॉन्स्टेंस अपने अपाहिज पति क्लिफ़र्ड के प्रति पूरी तरह समर्पित है और वह उसकी सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ती।

क्लिफ़र्ड और कोनी (कॉन्स्टेंस) का वैवाहिक जीवन उन लोगों की अपार संपत्ति, अभिजात जीवन शैली और उनकी आलीशान कोठी जो ‘ रैग्बी‘ के नाम से मशहूर थी, में ही सिमटी रह जाती है।

सर–क्लिफ़र्ड को पत्नी की ख़ूबसूरत देहयष्टि का आभास है और वह अपनी यौन तृष्णा के प्रति जागरूक है किन्तु वह अपने अवयवों की निष्क्रियता से उत्पन्न विवशता को स्वीकार करता है।

इस समस्या से निदान पाने के लिए वह अपने भव्य शयन कक्ष में पलंग पर लेटे हुए या व्हील चेयर पर बैठकर अपना सारा समय साहित्य और संगीत का आनंद लेते हुए बिताता है।

मिसेज़ बोल्ट नामक एक कर्तव्य परायण अधेड़ उम्र की कुटिल और चतुर स्वभाव की परिचारिका सर–क्लिफ़र्ड की देखरेख के लिए प्रतिपल मौजूद रहती है। मिसेज़ बोल्ट लेडी चैटरली (कॉन्स्टेंस) की सुंदर देह के प्रति एक ईर्ष्या भरी दृष्टि रखती है।

इस उपन्यास के माध्यम से डी एच लॉरेंस मनुष्य के देह धर्म और उसकी आंतरिक प्रवृत्तियों का गहराई से अध्ययन करते हुए दिखाई देते हैं।

यह उपन्यास मूलत: स्त्री की यौनेच्छाओं के संदर्भ में पुरुष देह की सार्थकता पर विचार करता है। स्त्री सौन्दर्य के प्रति लॉरेंस के विचार उपन्यास की नायिका कॉन्स्टेंस के माध्यम से व्यक्त हुए हैं।

कॉन्स्टेंस के अनुसार स्त्री का सौन्दर्य केवल उसके बाहरी रूप या मुखमंडल ही में नहीं केन्द्रित रहता है बल्कि वास्तव में उसके आवरण में लिपटे और ढंके देह में समाया रहता है।

स्त्री सौन्दर्य की अनुभूति उसके वस्त्रों के भीतर छिपे अवयवों और देहयष्टि से होती है। इसी दृष्टि से ग्रीक और रोमन (एफ़्रोडाइट और वीनस) सौन्दर्य की प्रतिमाओं को नग्न रूप में तराशा गया।

कॉन्स्टेंस अपनी देह की सुंदरता के प्रति स्वयं मुग्ध थी किन्तु उसे अफ़सोस था कि उसका पति उसकी सुंदरता से विमुख और अनभिज्ञ है। वह अपने देह की मादक सुंदरता से क्लिफ़र्ड को सम्मोहित करने के लिए एक रात उसके सम्मुख निर्वस्त्र प्रकट होती है।

वह पति के मुख से अपनी सम्मोहक देह की प्रशंसा सुनना चाहती थी जिससे आंशिक रूप से उसकी यौन तुष्टि मानसिक धरातल पर हो सके।

किन्तु उसे अपने निर्वसन देह प्रदर्शन के लिए क्लिफ़र्ड से क्रोध भरी भर्त्सना मिलती है। क्लिफ़र्ड के इस संवेदनहीन नपुंसक नीरसता पर उसे खीझ होती है। वह कुंठित और अपमानित अवस्था में पति के शयन कक्ष से निकल आती है।

उसे अपने सुंदर देह की निरर्थकता का बोध होने लगता है। यह बोध उसके लिए असहनीय और पीड़ादायक हो उठता है। वह उस यंत्रणा से मुक्त होना चाहती है।

अपनी नपुंसक अवस्था के बावजूद सर–क्लिफ़र्ड के मन में वंश वृद्धि के लिए अपना एक उत्तराधिकारी प्राप्त करने की प्रबल आकांक्षा मौजूद थी। वह अपनी इच्छा को कॉन्स्टेंस के सम्मुख प्रकट करने के लिए उतावला रहता है।

 
अंत में एक दिन वह अपनी भावना को व्यक्त कर देता है। वह कॉन्स्टेंस को किसी भी पुरुष से संसर्ग कर उसे एक वारिस देने की माँग कर बैठता है। कॉन्स्टेंस, क्लिफ़र्ड के इस मूर्खतापूर्ण प्रस्ताव को टाल देती है।

 

कहानी के इस मोड़ पर कॉन्स्टेंस के जीवन में उथल–पुथल मचाने वाला पात्र ऑलीवर मैलर्स प्रवेश करता है। कॉन्स्टेंस का प्रथम परिचय मैलर्स से उन्हीं के जंगली इलाक़े में होता है।

कॉन्स्टेंस, मैलर्स को अपनी झोपड़ी के पीछे अर्धनग्न अवस्था में स्नान करते हुए देखती है। वह छिपकर उसे देर तक निहारती है।

मैलर्स का खुरदरा गठीला मांसल शरीर उसे मोहित कर लेता है। उसके तन और मन में कामुकता का भाव जाग उठता है। वह उस पुरुष के प्रति अनायास रूप से आकर्षित होती चली जाती है।

मैलर्स के शरीर में जो खिंचाव था वह उससे बच नहीं पाती। मैलर्स भी लेडी चैटरली की सुंदरता से मोहित होकर अपना–आपा खो बैठता है और वह अपनी मालकिन को अपनी बाँहों में भरकर बेतहाशा प्यार करता है।

कोनी कोई विरोध नहीं करती और वह अपने को उसके हवाले करती जाती है। दोनों में एक दूसरे के लिए तीव्र आकर्षण के साथ प्रेम का उन्माद फूट पड़ता है और वे दोनों एक दूसरे के लिए व्याकुल होने लगते हैं।

अब लेडी चैटरली रोज़ किसी न किसी बहाने से‘रैग्बी’से निकलकर मैलर्स की झोपड़ी में पहुँच जाती और स्वयं को मैलर्स को सौंप देती। इधर सर–क्लिफ़र्ड की देखभाल करने वाली मिसेज़ बोल्टन लेडी चैटरली पर नज़र रखने लगती है।

मैलर्स लेडी चैटरली को पाकर उसके प्रति समर्पित हो जाता है। वह उससे प्रेम करने लगता है। दोनों एक दूसरे से प्रेम करने लगते हैं। दोनों के बीच अतृप्त प्रेम की प्यास बुझाने का कभी न ख़त्म होने वाला सिलसिला चल पड़ता है।

वे दोनों एक दूसरे के लिए पूरी तरह समर्पित हो जाते हैं। वे अपने मिलन के क्षणों में उस वर्गभेद को भुला देते हैं जो उनके बीच दीवार बन सकती थी।
जीवन की अंतहीन एकरसता को तोड़ने के लिए, कॉनी उस छोटी सी झोपड़ी में जाने लगती है जहाँ मेलोर्स मुर्गियों के एक झुंड की देखभाल करता है।

कुछ हफ्तों बाद, मुर्गियों के अंडे से बच्चे निकलने लगते हैं, जिससे कॉनी फूट-फूटकर रोने लगती है; मुर्गियों के “अंडे सेने वाले शरीर” उसे अपनी दयनीय स्थिति की याद दिलाते हैं, “अकेली और उपेक्षित”।

कॉनी के कोमल रोने से मेलोर्स के मन में आकर्षण की चिंगारी भड़क उठती है और दोनों शारीरिक संबंध बनाते हैं। हालाँकि शारीरिक संबंध उतना प्रभावशाली नहीं होता, फिर भी इस संक्षिप्त मुलाकात के बाद कॉनी और मेलोर्स दोनों को “जीवन” का एक नया एहसास होता है।

अगले दिन, कॉनी मेलोर्स की झोपड़ी में लौटती है और वे फिर से शारीरिक संबंध बनाते हैं। मेलोर्स कॉनी के नग्न शरीर को छूने के लिए बेताब होता है और उसकी यह इच्छा कॉनी को मंत्रमुग्ध और अभिभूत कर देती है।

अपना दिमाग शांत करने के लिए, कॉनी कुछ दिनों के लिए मेलर्स की झोपड़ी से दूर रहती है।

अपना ध्यान भटकाने के लिए, वह क्लिफोर्ड के धर्मपिता लेस्ली विंटर और क्लिफोर्ड की एक किराएदार श्रीमती फ्लिंट से मिलने जाती है।

श्रीमती फ्लिंट ने हाल ही में एक बच्चे को जन्म दिया है, और कॉनी को उनकी मातृत्व की खुशी से ईर्ष्या होने लगती है।

श्रीमती फ्लिंट के घर से लौटते समय, कॉनी की मुलाकात मेलर्स से होती है, जो उससे पूछता है कि वह उससे क्यों बच रही है।

दोनों जंगल में शारीरिक संबंध बनाते हैं। इस बार, कॉनी और मेलर्स दोनों को एक ही समय पर चरम सुख प्राप्त होता है, जिसे मेलर्स एक दुर्लभ और सुंदर अनुभव मानता है। घर लौटते समय, कॉनी मेलर्स के साथ बच्चा पैदा करने के बारे में सोचती है।

कॉनी और मेलोर्स का प्रेम प्रसंग जारी है, और उनके बीच प्यार गहराता जा रहा है, हालांकि मेलोर्स बच्चा नहीं चाहता; वह भविष्य को लेकर बेहद निराशावादी है, क्योंकि उसका मानना है कि मशीनों के कारण भविष्य बर्बाद हो रहा है, जो पुरुषों को नपुंसक बना रही हैं और प्रदूषण फैला रही हैं।

समय के साथ साथ कोनी से अपने लिए एक वारिस प्राप्त करने की इच्छा क्लिफ़र्ड में बलवती होते जाती है। किन्तु क्लिफ़र्ड की शर्त थी कि उसका वारिस किसी संभ्रांत व्यक्ति के समागम से पैदा हो। कॉन्स्टेंस, क्लिफ़र्ड की उच्च वर्गीय वर्ग भेद की मानसिकता को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थी।

वह प्रगतिशील विचारों वाली उन्मुक्त जीवन जीने की अदम्य जिजीविषा से युक्त स्त्री थी, वह ब्रिटिश समाज में व्याप्त वर्ग भेद का खुलकर विरोध करने का साहस रखती थी, किन्तु इसके विपरीत क्लिफ़र्ड अपने उच्च संभ्रांत वर्ग की जीवन शैली के प्रति अत्यंत सजग था।

कॉन्स्टेंस, अपनी बहन हिल्डा को अपने और मैलर्स के प्रेम संबंध के बारे में सब कुछ बता देती है।

हिल्डा अपनी बहन के एक स्वस्थ पुरुष के साथ पनपते हुए प्रेम संबंध को जानकर प्रसन्न हो जाती है किन्तु उसे मैलर्स की निम्नवर्गीय आर्थिक और सामाजिक स्थिति खटकती है।

जब कॉन्स्टेंस मैलर्स से गर्भ धारण करती है तो उसके लिए निर्णय का क्षण आ जाता है। वह अपने और मैलर्स के संबंध को क्लिफ़र्ड के सम्मुख प्रकट कर देना चाहती है। इसके लिए वह उचित अवसर की प्रतीक्षा में रहती है।

हिल्डा के आग्रह पर कॉन्स्टेंस उसके संग अपने पिता के पास कुछ समय बिताने के लिए लंदन चली जाती है। लंदन रवाना होने से पहले वह पूरी रात मैलर्स के संग जंगल के वीराने में स्थित उसकी झोंपड़ी में बिताती है उसकी रैग्बी में कॉन्स्टेंस की अनुपस्थिति में मैलर्स अनेक मुसीबतों में घिर जाता है।

उसके और लेडी चैटरली के अवैध संबंध की चर्चा क़स्बे के खान मज़दूरों के बीच सुनाई पड़ने लगती है। मैलर्स की पत्नी जो उससे बहुत समय पहले अलग हो चुकी थी, वह उस पर अन्य स्त्री से अवैध संबंध के मुद्दे पर मुक़दमा कर देती है।

क्लिफ़र्ड मैलर्स के काम से असंतुष्ट होकर उसे अपने एस्टेट से निकाल बाहर कर देता है। मैलर्स उसी क़स्बे की कोयले की भट्टियों में आजीविका के लिए काम करने लगता है।

मिसेज़ बोल्टन के पत्र द्वारा जब कॉन्स्टेंस को मैलर्स की ख़बर मिलती है तो वह क्लिफ़र्ड के पास ‘रैग्बी’लौट आती है। वह मैलर्स को ढूँढ़ते हुए क़स्बे के कोयले की भट्टियों में पहुँचती है और मैलर्स को दयनीय अवस्था में पाती है। वे दोनों अपने भविष्य के लिए चिंतित होने लगते हैं।

कॉन्स्टेंस किसी भी स्थिति में मैलर्स का साथ नहीं छोड़ना चाहती थी। वह मैलर्स और उसके बच्चे के साथ एक सुखी जीवन की कल्पना करने लगी थी। किंतु यह उस क़स्बे में असम्भव था। मैलर्स इंग्लैंड छोड़कर केनेडा चले जाने का विचार व्यक्त करता है।

कॉन्स्टेंस अपना निर्णय सुनाने के लिए रैग्बी पहुँचती है। वह क्लिफ़र्ड को अपने गर्भवती होने का समाचार देती है और साथ ही मैलर्स को उस बच्चे का पिता घोषित करती है। इस ख़बर को सुनकर क्लिफ़र्ड आगबबूला हो उठता है। वह मैलर्स और कॉन्स्टेंस के संबंध को स्वीकार नहीं कर सकता था।

कॉन्स्टेंस, क्लिफ़र्ड से तलाक़ की माँग करती है जिससे कि मैलर्स के साथ विवाह करने के लिए क़ानूनी तौर पर उसका रास्ता सुगम हो जाता। लेकिन क्लिफ़र्ड साफ़ शब्दोँ में तलाक़ देने से इनकार कर देता है।

लेडी चैटरली सर क्लिफ़र्ड को अलविदा कहकर हमेशा के लिए रैग्बी और पति क्लिफ़र्ड को छोड़कर चली जाती है। उपन्यास का अंतिम संस्करण जो मूल संस्कारण के रूप में प्रचलित है उसके अनुसार –

रैग्बी छोड़कर कॉन्स्टेंस हिल्डा के साथ लंदन चली जाती है और वहाँ से वह स्कॉटलैंड जाने का मन बना लेती है। मैलर्स भी लंदन के पास के एक गाँव के फ़ार्म हाउस में नौकरी करने लगता है।

कॉन्स्टेंस और मैलर्स के बीच पत्र व्यवहार चलता है। तलाक़ के मुक़दमे में मैलर्स की पत्नी के हाज़िर न होने के कारण अदालत एक तरफ़ा फ़ैसला सुनाकर तलाक़ की मंजूरी दे देती है जिससे मैलर्स अपने पूर्व–विवाह के बंधन से मुक्त हो जाता है।

वह कॉन्स्टेंस और अपने बच्चे के साथ एक नए जीवन को आरंभ करने के सपनों में डूबा रहता है। मैलर्स के पत्रों में कॉन्स्टेंस के प्रति प्यार की जानी–पहचानी ऐसी भावुकता होती थी जिसे पढ़कर वह कल्पनाओं में खोकर भविष्य के सुखद सपनों को देखा करती थी।

 

आगे आने वाला समय उनके लिए संपूर्ण आज़ादी के साथ मधुर मिलन का संदेश लेकर आने वाला था।क्लिफ़र्ड ने वही किया जिसकी कॉन्स्टेंस को आशा थी। वह तलाक़ के मामले को अदालत में ले जाने के बदले ख़ामोश हो जाना चाहता था।

उसकी ख़ामोशी ही उसकी तरफ़ से तलाक़ का संदेश था। धीरे–धीरे मैलर्स और कॉन्स्टेंस, दोनों के रास्ते की हर रुकावट दूर हो रही थी। दोनों को उस वक़्त का इंतज़ार था जब वह समाज के सामने पति–पत्नी का दर्जा पा लेंगे और वे अपने बच्चे के साथ सुखी परिवार बसा लेंगे।

उपन्यास के प्रथम संस्करण में अंत अधूरा रह गया है। उपन्यास का अंत वहीं हो जाता है जब कॉन्स्टेंस क्लिफ़र्ड से मैलर्स से अपने संबंधों को उजागर करती है और उसके साथ विवाह करने का अपना निर्णय सुनाकर मैलर्स के बच्चे की माँ बनने की ख़बर उसे देती है।

क्लिफ़र्ड आगबबूला हो उठता है। कॉन्स्टेंस उसी क्षण क्लिफ़र्ड की कोठी ‘रैग्बी‘ को छोड़कर चली जाती है अपनी नई दुनिया बसाने के लिए।

इसमें लेडीचैटरली अंत में सर–क्लिफ़र्ड के संग अपने वैवाहिक संबंध को ख़त्म कर उसे अलविदा कहकर‘ रैग्बी हॉल‘से निकलते समय उसे मैलर्स का पत्र प्रप्त होता है जिसमें वह हमेशा के लिए इंग्लैंड छोड़कर केनेडा के लिए रवाना होने की सूचना देता है।

पत्र को पढ़कर कोन्स्टेंस तुरंत अपनी बहन हिल्डा के संग साउथ हेम्पटन बन्दरगाह के लिए निकल पड़ती है। मैलर्स और लेडी चैटरली का मिलन केनेडा के लिए रवाना होते हुए जहाज़ पर हो जाता है।

The End

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